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गुड फ्रायडे  येशु म्हणजे जीजस यांच्या जिवंत होण्याच्या आनंदामध्ये साजरा केला जातो. येशू मसीहा चा जन्म साधारणपणे इसवी सन २ ते ७ च्या दरम्यान झाला होता. अन ख्रिसमस पहिल्यांदा येशूच्या जन्मस्थानाच्यापासून हजारो मैल दूर रोममध्ये इसवी सन ३३६ मध्ये साजरा केला गेला होता.

आज व्हायरल महाराष्ट्र तुमच्यासाठी एक खूप interesting गोष्ट घेऊन आलेल आहे. व्हायरल पोस्ट सदरात आम्हाला हि गोष्ट युट्युबवर सापडली अन शहानिशा केल्यानंतर आम्ही यावर हा लेख लिहित आहोत. तुम्ही यासंदर्भात विडीयो पाहू शकता. यापुढील कथा हिंदीमध्ये…

आज हम जानेंगे ख्रिसमस और ख्रिश्चन धर्म के बारे में. और साथ ही जानेंगे इस थ्योरी के बारे में, जिस में कहा गया हे की जीजस अपने अंतिम काल में भारत में .. कश्मीर में रहे थे...!! कई संस्कृतियों में एक सर्दियों का परंपरागत तरीके से मनाया जाने वाला लोकप्रिय त्योहार होता हे, जो साधारण तौर पर winter solestice यानी साल के सबसे छोटे दिन के नजदीकी समय में आता हे. जैसे भारत में “मकर संक्रांति” मनाया जाता हे.

“ईसाई धर्मातील लोक गुड फ्रायडे प्रभु येशूंनी मानवतेच्या रक्षणासाठी प्राण दिल्याच्या घनेच्या आठवणीत साजरा करतात. ईसाई धर्मातील प्रमुख ग्रंथ बायबाल आणि न्यू टेस्टामेंटनुसार इसा मसीह मृत्युच्या तीन दिवसानंतर पुन्हा जिवंत झाले होते. गुड फ्रायडेच्या निमित्ताने आम्ही तुम्हाला प्रभु येशू विषयी माहिती देत आहोत…”

इस बात में कोई दो राय नहीं की भारत में ख्रिश्चन धर्म यूरोप के कई देशो से पहले आया था, और केरल और दक्षिण के सीरियन चर्च काफी प्राचीन हे इंग्लॅण्ड के चर्चो से भी काफी प्राचीन. १८ वि और १९ वि शताब्दियों में काफी थ्योरीज और सिधांत सामने आये, जो ये दावा करते थे की जीजस यानी येशु मसीह अपने अंतिम काल में भारत रहे थे.

येशु के बचपन के १२ से लेकर ३० की उर्म तक के बारे में कही कुछ नहीं लिखा गया, न तो ओल्ड टेस्टामेंट में इसका उल्लेख हे और न ही न्यू टेस्टामेंट में…. पाश्चिमात्य दुनिया में ये “Unknown Years of Jijus” कहकर जाने जाते हे… ये साधारणतः इसवी सन ५ से २५ का समय था.

ये वही समय था जब पुरी दुनिया मे budhism अपनी जोर पर था… और लगभग ३०० साल पहले ही सम्राट अशोक का धर्मविजय शुरू हो चूका था, और दुनिया के दूरदराज कोनो तक अब बौद्ध धर्म की पुहच थी. ये वो वक्त था जाब बुद्ध धर्म अब जापान के दरवाजे पर भी बौद्ध धर्म पुहच चूका था. भारत में तब एक महान गुप्त साम्राज्य का शासन था, और इस शासन के काल में भी बौद्ध धर्म फल-फुल रहा था. समकालीन समय में भारत के आलावा चीन और अफगानिस्तान बौद्ध धर्म के बड़े केंद्र बन चुके थे, इरान में भी बौद्ध धर्म काफी बड़े तौर पर follow किया जाता था. अफगाणिस्तान तो मानो बुद्धिस्त मोन्क का अपना घर बन चुका था….

कुछ शोधकर्ताओ की माने तो इसीके चलते अफगानिस्तान से निकलकर बौद्ध धर्म से जुडी एक धारा पलेस्टाइन तक पुहच गयी, और युवा जीजस इसी के प्रभाव में आकर इन १८ सालो में कुछ साल भारत में रहे थे और यहाँ उन्होंने काफी पढाई करी थी. और इसे साबित करने हेतु शोधकर्ता बुद्धिस्त और ख्रिस्चियन teachings की काफी बुनियादी समानताये दिखाते हे. पर इन सब थ्योरिया से थोड़ी सी अलग पर गुलाम अहमद की थ्योरी सबसे मजबूत मानी जाती हे, जो पुरे विश्व में काफी प्रसिद्ध हे, और आज भी इसे मानने वाले बहोतसे लोग हे.

उनकी माने तो, जीजस भारत में अपने crucifixion के बाद आये, और उन्हें बुद्ध के विचार ने नहीं तो बुद्धिस्त monk भारत ले आये थे. साथ ही गुलाम मोहम्मद उन Jew बुध्हिस्त monks के बारे में भी बताते हे जिन्हें येशु ने शिक्षा दी थी और उन्होंने येशु को बुद्ध का अवतार मानकर आस्था बनायीं थी. साधारण तौर पर ऐसा मन जाता हे की ‘एस्सेन’ सम्प्रदाय” जो मूल इस्रायली समुदाय जो बादमे अफगानिस्तान और कश्मीर में रहने लगा था उन लोगों ने सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह को बचाया और हिमालय की औषधीय पौधों तथा जड़ी बूटियों से उन्हें पुनर्जीवित किया था.

कश्मीर जाकर येशु ने वहा काफी सम्मानजनक जिन्दगी गुजारी, और काफी जगह इंसानियत की सिख दी… श्रीनगर के पास वाले एक जीर्ण मंदिर मेभी येशु द्वारा दिए गये प्रवचन की कथाये प्राचीन काल से प्रचलित हे. कश्मीरी और इस्लाम की अहमदिया सेक्ट के लोग मानते हे की रोझाबाल, कश्मीर में येशु मसीह अपनी आयु के १२० वे वर्ष मृत्यु को प्राप्त हो गये.

हालाकी ये सब थ्योरीज हे, वास्तव में crusification के बाद या १८ साल के The Unknown Years में क्या हुवा ये कोई नहीं जनता… !!पर हजारो साल की लोक-कथाये… इसाई, इस्लामिक और बुद्धिस्त ग्रंथो के साधर्म्य और वर्णन ये सोचने के लिए जरुर मजबूर कर देते हे …. की शायद येशु मसीह ने भारत की पावन भूमि को अपने अंतिम सालो के लिए चुना था ….
आप क्या सोचते हे, कमेन्ट में बताये…

टीप – हि गोष्ट ©मिथक टीवी इंडिया यांच्या मालकीची असून, इतर कुठेही रीपोस्ट करण्यासाठी त्यांची परवानगी घ्यावी.